Wednesday, 22 January 2014

टी.आर.पी. बढ़ाने के लिए ऐतिहासिक तथ्यों को दरकिनार करता सीरियल महाराणा प्रताप

      दिन भर की आपाधापी भरी जिन्दगी के बाद रात्रि को कुछ समय परिवार के साथ मिल-बैठकर टी.वी. देखने का अवसर मिलता है, उसमें भी न्यूज चैनलों की होने वाली निरर्थक चर्चाओं, आरोप-प्रत्यारोपों की अन्तहीन बहस से ऊबकर किसी अच्छे मनमाफिक सीरियल की खोज में चैनल बदलते रहते हैं। कुछ समय तक सीरियल अच्छे भी लगते हैं लेकिन फिर ऐसा लगने लगता है कि वे किसी भी विषय को अनावश्यक रूप से विस्तार दे रहे हैं। भले ही व्यावसायिक दृष्टि से टी.आर.पी. बढ़ाने के लिए सुन्दर दमकते चेहरे, आपसी नोक-झोंक, षड़यंत्र, फूहड़ हास्य-व्यंग आदि दिखाना उनकी जरूरत बन बैठी हो। स्वस्थ मनोरंजन की चाहत में रिमोट से चैनल-दर-चैनल बदलते रहना हमारी मजबूरी हो गई है।   
एक समय था जब दूरदर्शन पर महाभारत और रामायण सीरियल का प्रसारण होता था तब लोग अपने सारे कामकाज छोड़कर  बड़ी श्रद्धा से टीवी से चिपक जाते थे इसके कारण सड़कों पर कर्फ्यू जैसा सन्नाटा पसर जाता था।  समय के साथ चैनलों की भरमार और आपसी प्रतिस्पर्धा के चलते बहुत से चैनलों पर एक साथ लोगों को धार्मिक और ऐतिहासिक सीरियल देखने को मिले तो लगा उनके हाथ कुबेर का खजाना आ गया है। लेकिन व्यावसायिकता ने बड़ी जल्दी ही मूलभावना को दरकिनार किया तो लोगों की भावनाएं आहत हुई जिससे दर्शकों की संख्या सीमित होती गई। 
आजकल वीर पुत्र महाराणा प्रताप सीरियल को देखकर शुरूवाती दौर में मन को समाधान हुआ कि ऐतिहासिक विषय को लेकर सोनी टी.वी. चैनल ने एक अच्छी पहल की है। अनेक प्रसंगों की जानकारी जनसामान्य को इसके माध्यम से प्राप्त हुई। मन को बहुत तसल्ली हुई कि चलो कोई तो चैनल पूरी ईमानदारी से राष्ट्रप्रेम जगाने का संदेश पहुंचाने में कामयाब हो रहा है। लेकिन पिछले कुछ समय से जैसे सीरियल को किसी की नजर लग गई को अनावश्यक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाने लगा है। जैसे- बेहरम खान की सेना द्वारा चूहे पकड़ने के दृश्य तथा बूंदी नरेश राव सुल्तन सिंह के मजाकिया स्वरूप को अनावश्यक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाना। इसी प्रकार राणा उदयसिंह की रानियों की आपसी वैमन्यस्यता को लगभग हर एपिसोड में दिखाया जाना। 
वास्तव में महाराणा प्रताप हम सभी के आदर्श तेजस्वी व्यक्तित्व हैं। उनके अनेक प्रसंग तन-मन में उत्साह का संचार कर राष्ट्रभाव को जगाते हैं। निश्चित ही हम उनके शौर्य और पराक्रम के बारे में और अधिक से अधिक जानना चाहेंगे। मुगलों से लोहा लेने वाले महाराणा प्रताप के प्रति हम भारतीय के मन में अगाध श्रद्धा है। इस तरह के ऐतिहासिक सीरियलों के माध्यम से उनके जीवन के अनछुए पहलूओं को उजागर करने का कार्य बखूबी किया जा सकता है।  
मेरे साथ ही अनेक परिवार इस सीरियल का इंतजार बड़ी उत्सुकता से करते हैं। आने वाले दृश्य की क्लिपिंग्स में उनके पराक्रम वाले ऐतिहासिक प्रसंगों की झलकियां देखने के बाद हम टकटकी लगाकर उनका बेसब्री से इंतजार करते हैं, लेकिन उसके बदले हम अनावश्यक रूप से तथाकथित बेहूदा प्रसंगों को झेलने के लिए मजबूर हो जाते हैं। सोनी जैसे लोकप्रिय टी.वी. चैनल के लिए ऐसे ऐतिहासिक सीरियलों को तोड़-मरोड़ कर दिखाना न तो उनकी प्रतिष्ठा के अनुरूप है और न ही  एक वीर व्यक्तित्व की प्रतिष्ठा के।
 .....  डॉ. मधुसूदन देशपाण्डे